Iftar Ki Dua in Hindi: Arabic, Meaning, Roman English & Roza Kholne Ki Dua

Ramzan का महीना रहमत, बरकत और मग़फिरत का महीना माना जाता है। पूरे दिन रोज़ा रखने के बाद जब इफ्तार का समय होता है, तो हर रोज़ेदार की खुशी देखने लायक होती है। लेकिन सिर्फ रोज़ा खोलना ही काफी नहीं है। इस समय अल्लाह का ज़िक्र करना और इफ्तार की दुआ पढ़ना भी सुन्नत है।

इसी वजह से बहुत से लोग इंटरनेट पर iftar ki dua in hindi, roza iftar ki dua in hindi, ramzan ki iftar ki dua in hindi, sehri aur iftar ki dua in hindi, और iftar ki dua in hindi meaning जैसी जानकारी खोजते हैं।

अगर आप भी इफ्तार की सही दुआ, उसका अरबी टेक्स्ट, रोमन इंग्लिश, हिंदी अर्थ और उसकी अहमियत जानना चाहते हैं, तो यह गाइड आपके लिए है।


इफ्तार की दुआ क्या है?

इफ्तार की दुआ वह दुआ है जो मुसलमान रोज़ा खोलते समय पढ़ते हैं। यह दुआ अल्लाह का शुक्र अदा करने और उससे अज्र की उम्मीद रखने का एक खूबसूरत तरीका है।

हदीस में रोज़ा खोलने के समय पढ़ी जाने वाली एक मशहूर और प्रमाणिक दुआ मिलती है, जिसे नबी ﷺ ने सिखाया।


Authentic Iftar Ki Dua (Arabic)

Arabic

ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ وَثَبَتَ الْأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ


Iftar Ki Dua in Roman English

Dhahabaz zama’u wabtallatil ‘urooqu wa thabatal ajru in shaa Allah.


Iftar Ki Dua in Hindi

हिंदी अर्थ

“प्यास खत्म हो गई, रगें तर हो गईं और अगर अल्लाह ने चाहा तो रोज़े का सवाब निश्चित हो गया।”

यह छोटी लेकिन बेहद खूबसूरत दुआ रोज़ेदार को अल्लाह की नेमतों की याद दिलाती है और उसके दिल में शुक्रगुज़ारी पैदा करती है।


Iftar Ki Dua in English

English Translation

“The thirst has gone, the veins are moistened, and the reward is confirmed, if Allah wills.”

यह अंग्रेज़ी अनुवाद उन लोगों के लिए उपयोगी है जो अरबी सीख रहे हैं और दुआ का अर्थ समझना चाहते हैं।


Roza Iftar Ki Dua in Hindi

बहुत से लोग Roza Iftar Ki Dua in Hindi सर्च करते हैं क्योंकि वे रोज़ा खोलते समय सही दुआ याद करना चाहते हैं।

रोज़ा खोलने का सबसे बेहतर तरीका यह है कि जैसे ही मगरिब का समय हो, बिना अनावश्यक देरी किए खजूर या पानी से इफ्तार करें और फिर यह दुआ पढ़ें।

रोज़ा खोलने का समय अल्लाह से दुआ मांगने के लिए भी बहुत खास माना जाता है। इसलिए इफ्तार की दुआ पढ़ने के बाद अपनी ज़रूरतों और भलाई के लिए भी अल्लाह से दुआ करें।


Ramzan Ki Iftar Ki Dua in Hindi

Ramzan Ki Iftar Ki Dua in Hindi और Ramadan Iftar Ki Dua in Hindi दोनों का मतलब एक ही है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि रमज़ान के लिए कोई अलग इफ्तार की दुआ नहीं है।

रमज़ान में भी वही दुआ पढ़ी जाती है जो किसी भी रोज़े को खोलते समय पढ़ी जाती है।

यानी चाहे रमज़ान का रोज़ा हो या किसी और अवसर का नफ़्ल रोज़ा, इफ्तार की सुन्नत दुआ एक ही रहती है।


एक दूसरी मशहूर इफ्तार की दुआ

कई लोग यह दुआ भी पढ़ते हैं:

Arabic

اللَّهُمَّ لَكَ صُمْتُ وَعَلَى رِزْقِكَ أَفْطَرْتُ

Roman English

Allahumma laka sumtu wa ‘ala rizqika aftartu.

हिंदी अर्थ

“ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा और तेरी ही दी हुई रोज़ी से इफ्तार किया।”

यह दुआ मुस्लिम समाज में काफी प्रचलित है। हालांकि, विद्वानों ने इसकी रिवायत (chain of narration) पर चर्चा की है। इसलिए बहुत से विद्वान ऊपर दी गई “Dhahabaz zama’u…” वाली हदीस को अधिक प्रमाणिक मानते हैं।

यदि कोई व्यक्ति इस दुआ को पढ़ता है, तो उसे चाहिए कि वह इसकी रिवायत की स्थिति को समझते हुए प्रमाणिक सुन्नत दुआ को प्राथमिकता दे।


Iftar Ki Dua in Hindi Meaning

अगर हम इस दुआ के अर्थ पर ध्यान दें, तो इसमें केवल प्यास बुझने की बात नहीं है।

यह दुआ हमें याद दिलाती है कि:

  • रोज़ा अल्लाह के लिए रखा गया था।
  • अल्लाह ने हमें रोज़ा पूरा करने की ताकत दी।
  • अब हम उसी की दी हुई नेमतों से इफ्तार कर रहे हैं।
  • असली सवाब अल्लाह ही देगा।
  • हर काम अल्लाह की मर्ज़ी से पूरा होता है।

यही वजह है कि यह छोटी सी दुआ बहुत गहरे मायने रखती है।


Iftar Ki Dua in Hindi Mein

अगर आप पहली बार यह दुआ सीख रहे हैं, तो सबसे पहले उसका हिंदी अर्थ समझें।

इसके बाद रोमन इंग्लिश की मदद से सही उच्चारण सीखें।

धीरे धीरे अरबी टेक्स्ट याद करने की कोशिश करें ताकि आप वही दुआ पढ़ सकें जो नबी ﷺ से प्रमाणिक रूप से साबित है।

कुछ दिनों तक लगातार पढ़ने से यह दुआ आसानी से याद हो जाती है।


रोज़ा खोलने का सही तरीका

इस्लाम हमें सिखाता है कि इफ्तार का समय होते ही बिना वजह देरी नहीं करनी चाहिए।

सुन्नत के अनुसार:

  • समय होते ही रोज़ा खोलें।
  • यदि उपलब्ध हो तो पहले खजूर से इफ्तार करें।
  • यदि खजूर न हो तो पानी से रोज़ा खोलें।
  • इफ्तार की दुआ पढ़ें।
  • अल्लाह का शुक्र अदा करें।
  • इसके बाद मगरिब की नमाज़ अदा करें।

इस तरह इफ्तार करना नबी ﷺ की सुन्नत के अधिक निकट माना जाता है।


इफ्तार के समय दुआ क्यों कबूल होती है?

हदीसों में यह उल्लेख मिलता है कि रोज़ेदार की दुआ को विशेष महत्व प्राप्त है और इफ्तार के समय दुआ करने का अवसर बहुत बरकत वाला माना गया है।

इसीलिए जब आप इफ्तार करें, तो केवल इफ्तार की दुआ पढ़कर ही न रुकें।

अपने माता पिता, परिवार, बच्चों, रोज़ी, सेहत, मग़फिरत और पूरी उम्मत के लिए भी दिल से दुआ करें।

अल्लाह से की गई सच्ची और विनम्र दुआ हर मोमिन की सबसे बड़ी ताकत होती है।

Sehri Aur Iftar Ki Dua in Hindi

बहुत से लोग “Sehri Aur Iftar Ki Dua in Hindi” एक साथ सर्च करते हैं क्योंकि वे रमज़ान के दौरान दोनों समय पढ़ी जाने वाली दुआ जानना चाहते हैं।

यह समझना ज़रूरी है कि सेहरी (सुहूर) और इफ्तार दोनों का इस्लाम में अलग महत्व है।

सेहरी के समय सबसे महत्वपूर्ण चीज़ नीयत (इरादा) है। इस्लामी विद्वानों के अनुसार रोज़े की नीयत दिल में होना ही पर्याप्त है। रोज़ा रखने के लिए कोई विशेष और अनिवार्य मौखिक नीयत (वर्बल दुआ) प्रमाणिक हदीस से साबित नहीं है।

जबकि इफ्तार के समय नबी ﷺ से प्रमाणिक रूप से दुआ पढ़ना साबित है, जिसे हमने पहले भाग में बताया।

इसलिए सेहरी के समय अल्लाह का ज़िक्र करें, बिस्मिल्लाह पढ़ें, नीयत रखें और इफ्तार के समय सुन्नत दुआ पढ़ें।


Sehri and Iftar Ki Dua in Hindi

अगर आप Sehri and Iftar Ki Dua in Hindi सीखना चाहते हैं, तो इसे आसान तरीके से समझें।

सेहरी

  • रोज़े की नीयत दिल में करें।
  • अल्लाह का नाम लेकर खाना खाएं।
  • फज्र से पहले सेहरी पूरी करें।
  • अल्लाह से रोज़ा आसानी से पूरा करने की दुआ करें।

इफ्तार

  • मगरिब का समय होते ही रोज़ा खोलें।
  • पहले खजूर या पानी लें।
  • इफ्तार की सुन्नत दुआ पढ़ें।
  • उसके बाद अपनी ज़रूरतों के लिए दुआ करें।

यही तरीका नबी ﷺ की सुन्नत के सबसे अधिक निकट माना जाता है।


Ramadan Iftar Ki Dua in Hindi

कई लोग सोचते हैं कि रमज़ान के लिए कोई अलग इफ्तार की दुआ होगी।

असल में Ramadan Iftar Ki Dua in Hindi वही है जो हर रोज़ा खोलते समय पढ़ी जाती है।

रमज़ान के पूरे महीने में इसी प्रमाणिक दुआ का पढ़ना पर्याप्त है।

इसलिए अलग अलग दुआ खोजने की आवश्यकता नहीं है।


Ramzan Me Iftar Ki Dua in Hindi

Ramzan Me Iftar Ki Dua in Hindi का उद्देश्य अल्लाह का शुक्र अदा करना और उससे सवाब की उम्मीद रखना है।

जब पूरा दिन भूख और प्यास सहने के बाद इंसान अल्लाह की दी हुई नेमतों से रोज़ा खोलता है, तब यह दुआ उसकी शुक्रगुज़ारी को और भी सुंदर बना देती है।

रमज़ान में इफ्तार केवल भोजन करने का समय नहीं है, बल्कि यह इबादत, दुआ और अल्लाह की रहमत प्राप्त करने का भी समय है।


Iftar Ki Dua in Hindi Urdu

भारत, पाकिस्तान और कई अन्य देशों में लोग Iftar Ki Dua in Hindi Urdu भी खोजते हैं।

हिंदी और उर्दू में अर्थ लगभग समान रहता है। केवल लिखने की भाषा अलग होती है।

यदि आपको अरबी पढ़ने में कठिनाई होती है, तो पहले हिंदी या उर्दू अर्थ समझें। फिर धीरे धीरे रोमन इंग्लिश की मदद से सही उच्चारण सीखें और अंत में अरबी याद करने की कोशिश करें।


Iftar Ki Dua in Hindi Full

कुछ लोग Iftar Ki Dua in Hindi Full लिखकर पूरी जानकारी खोजते हैं।

इफ्तार की संपूर्ण जानकारी में शामिल होना चाहिए:

  • अरबी टेक्स्ट
  • रोमन इंग्लिश
  • हिंदी अर्थ
  • अंग्रेज़ी अनुवाद
  • दुआ कब पढ़नी चाहिए
  • इफ्तार करने का सुन्नत तरीका
  • दुआ का महत्व
  • इफ्तार के समय की जाने वाली अन्य व्यक्तिगत दुआएँ

जब इन सभी बातों को समझ लिया जाता है, तब इफ्तार केवल एक आदत नहीं बल्कि एक खूबसूरत इबादत बन जाता है।


Iftar Ki Dua in Hindi Sunni

कई लोग Iftar Ki Dua in Hindi Sunni भी सर्च करते हैं।

सुन्नी परंपरा में रोज़ा खोलते समय सबसे अधिक प्रसिद्ध और प्रमाणिक मानी जाने वाली दुआ वही है जो हदीस में आती है:

ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ وَثَبَتَ الْأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ

कई स्थानों पर दूसरी दुआ “Allahumma laka sumtu…” भी पढ़ी जाती है, लेकिन उसके बारे में विद्वानों ने उसकी रिवायत पर चर्चा की है। इसलिए प्रमाणिक सुन्नत दुआ को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है।


Shia Iftar Ki Dua in Hindi

कुछ लोग Shia Iftar Ki Dua in Hindi भी जानना चाहते हैं।

विभिन्न इस्लामी परंपराओं में इफ्तार के समय पढ़ी जाने वाली कुछ दुआओं के चयन और अमल में अंतर पाया जा सकता है।

हालाँकि, सभी मुसलमानों का उद्देश्य एक ही होता है—अल्लाह का शुक्र अदा करना, उससे रहमत मांगना और रोज़े को उसकी रज़ा के लिए पूरा करना।

इस लेख में हमने उन दुआओं पर ध्यान केंद्रित किया है जो व्यापक रूप से जानी जाती हैं और जिनका आधार प्रमाणिक इस्लामी स्रोतों में मिलता है।


Muharram Iftar Ki Dua in Hindi

एक और सामान्य सवाल है कि Muharram Iftar Ki Dua in Hindi क्या अलग होती है?

उत्तर है नहीं।

अगर कोई व्यक्ति मुहर्रम के महीने में नफ़्ल या आशूरा का रोज़ा रखता है, तो इफ्तार के समय वही दुआ पढ़ी जाती है जो अन्य रोज़ों में पढ़ी जाती है।

मुहर्रम के लिए अलग से कोई प्रमाणिक इफ्तार की दुआ नहीं मिलती।


Iftar Ki Dua Image

बहुत से लोग Roza Iftar Ki Dua in Hindi Image या Iftar Ki Dua Image डाउनलोड करना चाहते हैं ताकि वे उसे अपने मोबाइल में सेव कर सकें या परिवार के साथ साझा कर सकें।

यदि आप ऐसा करना चाहते हैं, तो कोशिश करें कि ऐसी इमेज किसी भरोसेमंद इस्लामी वेबसाइट, प्रकाशन या संस्था से प्राप्त करें, ताकि अरबी टेक्स्ट और उसका अनुवाद सही हो।

गलत वर्तनी या अपूर्ण दुआ वाली तस्वीरों से बचना चाहिए।


इफ्तार करते समय होने वाली आम गलतियाँ

रमज़ान के दौरान कुछ गलतियाँ अक्सर देखने को मिलती हैं।

कुछ लोग मगरिब का समय होने के बाद भी बिना कारण इफ्तार में देर कर देते हैं, जबकि सुन्नत है कि समय होते ही रोज़ा खोल लिया जाए।

कुछ लोग केवल खाने की तैयारी में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि दुआ पढ़ना ही भूल जाते हैं।

कई लोग बिना किसी प्रमाण के सोशल मीडिया पर साझा की गई दुआओं को पढ़ने लगते हैं। इसलिए हमेशा प्रमाणिक इस्लामी स्रोतों से दुआ सीखनी चाहिए।

एक और गलती यह है कि लोग इफ्तार के समय केवल भोजन पर ध्यान देते हैं और दुआ करना भूल जाते हैं। जबकि यह समय अल्लाह से अपनी ज़रूरतें, माफी, सेहत, रोज़ी और पूरे उम्मत के लिए दुआ करने का बहुत ही बरकत वाला समय है।

इफ्तार की दुआ पढ़ने के फायदे

इफ्तार का समय पूरे दिन के रोज़े के बाद राहत और शुक्रगुज़ारी का समय होता है। इसी समय अल्लाह का ज़िक्र करना और इफ्तार की दुआ पढ़ना एक सुंदर सुन्नत है।

इफ्तार की दुआ पढ़ने के कुछ महत्वपूर्ण फायदे हैं:

  • अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करने का अवसर मिलता है।
  • रोज़ा पूरा करने की तौफ़ीक़ मिलने पर बंदा अपनी खुशी अल्लाह के सामने व्यक्त करता है।
  • दिल में अल्लाह पर भरोसा और उसकी याद बढ़ती है।
  • इफ्तार का समय दुआ करने का मुबारक समय माना जाता है।
  • इंसान अपने साथ साथ अपने परिवार, माता पिता और पूरी उम्मत के लिए भी दुआ कर सकता है।
  • यह आदत हमें हर नेमत की कद्र करना सिखाती है।

जब कोई मुसलमान हर रोज़ इफ्तार के समय यह दुआ पढ़ता है, तो धीरे धीरे यह उसकी ज़िंदगी का हिस्सा बन जाती है।


रोज़ा खोलने की सुन्नत

नबी ﷺ ने रोज़ा खोलने का सबसे अच्छा तरीका भी सिखाया है।

सुन्नत के अनुसार:

सबसे पहले मगरिब का समय होते ही बिना अनावश्यक देरी किए रोज़ा खोलें।

यदि खजूर उपलब्ध हो तो उससे इफ्तार करें। अगर खजूर न मिले तो पानी से भी रोज़ा खोला जा सकता है।

रोज़ा खोलने के बाद प्रमाणिक इफ्तार की दुआ पढ़ें और फिर अल्लाह से अपनी ज़रूरतों के लिए दुआ करें।

इसके बाद मगरिब की नमाज़ अदा करें और फिर आराम से भोजन करें।

यह तरीका न केवल सुन्नत के अधिक निकट है बल्कि इफ्तार को एक इबादत का रूप भी देता है।


इफ्तार में क्या खाना बेहतर है?

इस्लाम सादगी और संतुलन की शिक्षा देता है।

इफ्तार की शुरुआत खजूर और पानी से करना सुन्नत माना जाता है। इसके बाद व्यक्ति अपनी आवश्यकता और स्थानीय भोजन के अनुसार हल्का एवं पौष्टिक भोजन कर सकता है।

बहुत अधिक भोजन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसका प्रभाव इबादत, नमाज़ और तरावीह पर भी पड़ सकता है।

रमज़ान का उद्देश्य केवल भूख मिटाना नहीं बल्कि आत्मसंयम, शुक्रगुज़ारी और अल्लाह की इबादत में वृद्धि करना है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

इफ्तार की दुआ हिंदी में क्या है?

सबसे प्रसिद्ध और प्रमाणिक दुआ है:

ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ وَثَبَتَ الْأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ

हिंदी अर्थ:

“प्यास समाप्त हो गई, रगें तर हो गईं और यदि अल्लाह ने चाहा तो सवाब निश्चित हो गया।”


क्या रमज़ान के लिए अलग इफ्तार की दुआ होती है?

नहीं।

रमज़ान में भी वही प्रमाणिक इफ्तार की दुआ पढ़ी जाती है जो अन्य फ़र्ज़ या नफ़्ल रोज़ों के समय पढ़ी जाती है।


क्या मुहर्रम के रोज़े के लिए अलग इफ्तार की दुआ है?

नहीं।

मुहर्रम के रोज़े के लिए भी अलग प्रमाणिक इफ्तार की दुआ नहीं मिलती। वही सामान्य इफ्तार की दुआ पढ़ी जाती है।


क्या सेहरी के लिए कोई खास दुआ है?

सेहरी के समय सबसे महत्वपूर्ण चीज़ नीयत है।

इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार रोज़े की नीयत दिल में होना पर्याप्त है। कोई अनिवार्य विशेष मौखिक दुआ प्रमाणिक हदीस से साबित नहीं है।


क्या इफ्तार की दुआ अंग्रेज़ी या हिंदी में पढ़ सकते हैं?

प्रमाणिक दुआ अरबी में है और उसे याद करना बेहतर है।

यदि अभी अरबी याद नहीं है, तो पहले उसका हिंदी या अंग्रेज़ी अर्थ समझें। साथ ही आप अपनी भाषा में भी अल्लाह से व्यक्तिगत दुआ कर सकते हैं।


इफ्तार की दुआ कब पढ़नी चाहिए?

जब मगरिब का समय हो जाए और आप रोज़ा खोल रहे हों, उसी समय इफ्तार की दुआ पढ़ी जाती है।


क्या बच्चों को भी इफ्तार की दुआ सिखानी चाहिए?

जी हाँ।

बचपन से बच्चों को इफ्तार की दुआ सिखाने से उनमें अल्लाह की याद, शुक्रगुज़ारी और सुन्नत से प्रेम विकसित होता है।


पूरी जानकारी का सार

इफ्तार केवल भूख और प्यास खत्म करने का समय नहीं है, बल्कि यह अल्लाह का शुक्र अदा करने, उसकी रहमत मांगने और अपने रोज़े की स्वीकार्यता की दुआ करने का भी समय है।

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सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इफ्तार के समय वही दुआ पढ़ें जो प्रमाणिक सुन्नत से साबित है, उसका अर्थ समझें और फिर दिल से अल्लाह से अपनी ज़रूरतों, मग़फिरत, सेहत, रोज़ी और पूरी उम्मत के लिए दुआ करें।


Final Thoughts

रमज़ान हमें केवल भूखा रहना नहीं सिखाता, बल्कि सब्र, शुक्र, रहमत और अल्लाह पर भरोसा करना भी सिखाता है। पूरे दिन का रोज़ा जब इफ्तार पर समाप्त होता है, तो वह पल हर मुसलमान के लिए बेहद खास होता है।

इफ्तार की दुआ हमें यह याद दिलाती है कि रोज़ा पूरा करना भी अल्लाह की ही तौफ़ीक़ है और जो नेमतें हमारे सामने हैं, वे भी उसी का दिया हुआ करम हैं। इसलिए हर इफ्तार को केवल भोजन का समय न बनाएं, बल्कि उसे दुआ, शुक्रगुज़ारी और इबादत का खूबसूरत अवसर बनाएं।

अपने परिवार और बच्चों को भी यह सुन्नत सिखाएँ ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी रोज़ा खोलते समय अल्लाह को याद करने की इस सुंदर आदत को अपनाएँ।

अल्लाह तआला हम सभी के रोज़े, हमारी दुआएँ और हमारी इबादतें क़ुबूल फ़रमाए, हमें अपने ज़िक्र में हमेशा मशगूल रखे और रमज़ान की बरकतों से भरपूर हिस्सा अता फ़रमाए।

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